विभिन्न भावों के पुष्पों से सुसज्जित काव्य संग्रह ‘यादों के तरू’

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किताब का नाम
यादों के तरू
लेखिका
प्रीति चौधरी ‘मनोरमा’
पुस्तक का मूल्य
Rs. 166/-
प्रकाशक
प्राची डिजिटल पब्लिकेशन
समीक्षक
शाहाना परवीन

प्राची डिजिटल पब्लिकेशन्स के सानिध्य में प्रकाशित पुस्तक “यादो के तरू” एकल काव्य संग्रह है, जो जानी मानी लेखिका व कवयित्री प्रीति चौधरी जी ने लिखा है। यह उनका प्रथम ‘एकल काव्य संग्रह’ है। इस काव्य में लेखिका की लगभग 110 रचनाएँ शामिल हैं। यह काव्य सरल, और सहज भाषा शैली मे लिखा गया है। लेखिका ने अपनी समस्त रचनाओं में समाज, नारी, देश, रिश्तें, सम्बंध, दुख-सुख, शोषण, इंसानियत, प्रेम आदि से सुसज्जित रचनाएँ लिखी हैं।

जैसा कि आप सभी को पता है कि एक लेखक जब अपना काव्य संग्रह प्रकाशित करवाता है तो वह उसे किसी ना किसी को समर्पित करता है। क्योंकि लेखिका प्रीति चौधरी जी का यह प्रथम काव्य संग्रह है तो उन्होने इसे अपने जनम दाता माता पिता को समर्पित किया है। माता पिता का आशीर्वाद यदि साथ है तो प्रत्येक क्षेत्र मे सफलता मिलती है।

इस काव्य का आरंभ होता है एक बेहद सुंदर रचना से जिसमे लेखिका ने पति को सम्मान, देते हुए अपने बहुत सुंदर भाव प्रस्तुत किए हैं। दूसरी रचना ज़िंदगी के विषय मे लेखिका ने बताया है कि जीवन कभी ठहरता नहीं निरन्तर आगे बढ़ता रहता है। प्रतिदिन एक नवीन अध्याय हमारा स्वागत करता है। बाल श्रम, जन्म, विश्व रक्त दान दिवस और ख्वाब रचना में लेखिका ने विभिन्न भावों को बेहद मासूमियत के साथ प्रदर्शित किया है। बाल श्रमिको की व्यथा को समझना बहुत कठिन है लेखिका ने सुंदर रूप से चित्रित किया है।

कर्म और भाग्य, जीवन, प्रयास, दर्पण, पलायन और तूफान रचनाओं मे प्रीति जी ने कर्म व भाग्य का हमारे जीवन पर प्रभाव दर्शाया है। उन्होने सभी सामाजिक विषयो पर अपने विचार प्रकट किए हैं जो समाज को नई दिशा दिखाते प्रतीत हो रहे हैं। विदाई का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत कर हर स्त्री को भावुक कर दिया। “मैया भी रोए, बाबुल भी रोए, रोए सारा परिवार सच आँखो मे आँसू ले आता है। नयनो मे पीड़ा, मंहगाई, सत्य के प्रतिमान, सफर, नदी और आशा रचनाएँ लेखिका के अंतर्मन की एक नई कहानी रचते हैं। “बेटा” रचना मे कवियत्री ने एक नया उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बेटे की पीड़ा को उजागर किया है कि बेटा भी पिता के समान घर परिवार को संभालता है,उसके कंधो पर भी उत्तरदायित्वों का बोझ होता है हमें बेटे को भी समझना चाहिये।

प्रकृति गीत मे प्रकृति वर्णन तो यात्रा, सागर मे जीवन को नई सीख दिखाई देती है। भारत के वीरो के लिए समर्पित रचना मे वीर रस का समावेश और जोश उत्पन्न करने वाली भावना प्रदर्शित हो रही है। नफरत की बातें ना घोल, अनोखा स्नेह, अनुशासन सम्पूर्ण रचनाएँ हैं।

जहाँ आज धीरे धीरे पंछी लुप्त हो रहे है, वहीं गौरेया की रचना पढ़कर मन को शांति का अनुभव होता है। चेहरा, इम्तेहान अभी बाकी है, रंग, बचपन हमारे जीवन के ऐसे भाव हैं जिनसे हमारा प्रतिदिन सामना होता है। श्री राम की भक्ति पर रचना कमाल लिखी है। सम्मान, पथिक हारना नहीं, रोज़गार हौंसला नि:सन्देह हमारे ह्दय को छूती प्रतीत होती हैं।

सुहाग की पहचान चूड़ियों की खनखन बहुत सुंदर भाव। प्यार का अहसास, साया, रेगिस्तान और माँ यथार्थ को दर्शा रही हैं। गीतिका में कवियत्री ने वक्त को यादों मे ढलते हुए बताया है कि समय की गति बड़ी विशाल कब माता पिता को घर से वृद्धाश्रम मे पहुँचा दे, कब वक्त भाग्य बदल दे।

रचना डोली मे एक दुल्हन बनी सजनी के श्रृंगार को सुंदरता पूर्वक दर्शाया है। अधूरा इश्क, पायल की झंकार और रंगीला बचपन हमे अपनी बाल्यावस्था का स्मरण कराता है। बीच बीच मे मुक्तक लेखिका के काव्य मे चार चाँद लगाने का काम कर रहे हैं।

अनुभव, बसंत ऋतु मे बसंत का सुंदर चित्रण और एकाएक बेटियाँ और मेरी माँ रचनाएँ मार्मिक व स्नेह, वात्सल्य का दान देती प्रतीत हो रही हैं। भावनाओ की खुदकुशी रचना में कटुवचनो के हृदय को भेदते भावो को प्रस्तुत किया है। गजल के माध्यम से आजकल के परिवेश के विषय मे बताया है, सड़को पर चीरहरण है बहुत’ इस पक्ति से समाज व मानव की नीयत का स्पष्ट रुप से पता चलता है।

लेखिका की अपनी सबसे प्रिय रचना “यादो के तरू” वास्तव मे अपने आप मे सबसे सुंदर रचना है। लगता है जैसे कवियत्री ने इस रचना को लिखते समय अपनी आँखो को बंद कर महसूस किया है। तब उन्होने अपने मन की वाणी कागज पर उतारी है। एक से बढ़कर एक गज़ल काव्य की शान बढ़ा रही है। सारथी, अच्छा लगता है, लौटा दे कोई आज, हमे बीते समय की याद दिलाता है। माँ रचना प्रीति जी ने स्वयं को सामने रखकर लिखी है। क्योंकि वह भी एक माँ हैं। सत्य है सब कुछ मिल जाता है लेकिन माँ नहीं मिलती। आज का युग बदलता समय, भ्रष्टाचार रचना देश की स्थिति को बताती है। आँखे, पहला पहला प्यार, भीड़, कन्यादान सबसे बड़ा दान कवियत्री ने सुंदरता से बताया है। अंतिम रचना मे कवियत्री ने माता पिता को दो शक्स के रूप मे अपना शुभचिंतक, मार्ग प्रदर्शक बताते हुये कहा है कि सफलता तभी मिलती है जब इन दोनों का आशीर्वाद साथ रहता है।

कवियत्री की रचनाओं मे गहरे भाव छुपे हुए हैं। प्रत्येक रचना को पढ़ने के पश्चात ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं यह हमारे जीवन से जुड़ी है।

मै लेखिका कवियत्री प्रीति जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूगी जो उन्होने समाज और हम सबको बेहद सुंदर भावो से रचित काव्य दिया।

About the Book ‘Yadon Ke Taru’

विभिन्न भावों के पुष्पों से सुसज्जित काव्य संग्रह 'यादों के तरू'

‘यादों के तरु’ में मैंने कविताओं के माध्यम से जीवन के प्रत्येक पहलू को स्पर्श करने का प्रयास किया है। कोई कविता प्रेम को परिभाषित करती है.. कोई बचपन की गलियों में विचरण करती प्रतीत होती है… कभी कविता प्रेरणा संगीत बनकर जीवन को आशा से पूर्ण करती है… कभी इसके विपरीत कविता जीवन का दुःख और विषाद व्यक्त करती है… अधिकाँश कविताएँ मैंने अपनी प्राण-प्रिय माँ के चरण कमलों में अर्पित की हैं। इस संसार में एक से एक उत्कृष्ट रचनाकार हैं। किंतु चंद व्यक्ति ही साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में सफल होते हैं। जैसे रेगिस्तान में खिलने वाले दुर्लभ पुष्प अपनी सुगंध बिखेरकर मुरझा जाते हैं। जग उनकी महक से अनभिज्ञ रहता है। वैसे ही कुछ प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी प्रतिभा से इस जग को सुगंधित करने में असमर्थ होते हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता है।
– प्रीति चौधरी ‘मनोरमा’ (लेखिका)

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