
पिछले दिनों शिक्षिका एवं कवयित्री विभा वर्मा ‘वाची’ जी का काव्य संग्रह ‘काव्यारूण’ प्रकाशित हुआ है। AuthorsWiki द्वारा विभा वर्मा जी का साक्षात्कार किया गया और साक्षात्कार में हमने उनकी नई किताब के बारे में जानकारी प्राप्त की। साक्षात्कार में विभा जी ने अपनी साहित्य यात्रा के बारे में विस्तार से बताया और कई प्रेरक प्रसंग भी हमारे साथ शेयर किए। आशा करते हैं कि हमारे पाठकों को विभा वर्मा जी के साथ किया गया साक्षात्कार पसंद आएगा। पेश हैं आपके लिए साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश-
AuthorsWiki : विभा जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?
विभा वर्मा : नमस्कार और आपका हार्दिक अभिनंदन। मैं विभा वर्मा साहित्य जगत में अपने कदम जमाते हुए आप सभी को नमस्कार करती हूँ। मैंने अपने जीवनकाल में कॉलेज अध्यापिका से ले के समाज सेवा तक कई भूमिकाएँ निभाई हैं। मैं झारखंड प्रदेश से हूँ और ताउम्र मैंने परिवार पालन के अलावा अपनी समाज सेवी संस्था की क्षमता से झारखंड में महिलाओं की लिए रोज़गार उत्पादन में काफ़ी योगदान दिया। सेवा निवृत्ति के बाद राँची एवं विदेशों में अपने बेटों बहुओं एवं पौत्रों के बीच जीवन यापन कर रही थी।
करोना काल की महामारी में परिवार से दूर लॉक्डाउन के बीच मन के भाव व्यक्त करते हुए साहित्य जगत से साक्षात्कार हुआ। देखते ही देखते साहित्य से जुड़े हुए दिग्गजों के बीच एक पारिवारिक अपनापन सा लगने लगा और स्वतः लिखने की रुचि रोज़ ज़ोर पकड़ती गयी। अपने परिवार एवं सखियों के प्रोत्साहन से एक के बाद एक विभिन्न साहित्य पटलों के साथ सान्निध्य हुआ। साहित्य पटल में मुझे उपनाम सम्मान मिला और साहित्यिक दिग्गजों ने मुझे उपनाम ‘वाची’ से अलंकृत किया। फिर कई साझा संकलनों में प्रकाशन एवं 200 से ऊपर साहित्यिक सम्मान प्राप्ति के बाद मेरी पहली पुस्तक ‘काव्यारुण’ के विमोचन पर मन उल्लसित है और अपने सभी पाठकों का मैं हार्दिक अभिनंदन करती हूँ।
AuthorsWiki : आपकी पहली पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?
विभा वर्मा : ‘काव्यारुण’ काव्य संकलन की प्रेरणा मेरे पति श्री अरुण कुमार वर्मा हैं। अपने साहित्यिक सफ़र में विभिन्न विषयों पर लिखी कविताओं की शृंखला है ‘काव्यारुण’। परिवार, समाज, सामयिकी दिनचर्या एवं इतिहास और संस्कृति से जुड़े अलग-अलग पहलुओं से निर्मित यह काव्यमाला मेरे सभी चाहने वालों को समर्पित है। 99 कविताओं की सरल और सुगम डोरी आप पाठकों को ज़रूर भाएँगी और उत्साहवर्धन के लिए अपने सभी प्रियजनों को धन्यवाद करती हूँ। सरल दैनिक भाषा में लिखी कविताएँ मेरे मन के भावों को शब्दों में उजागर करती यह पुस्तक मेरे हृदय के बेहद क़रीब है और आशा करती हूँ मेरे पाठकों को भी भरपूर पसंद आएगी।
AuthorsWiki : विभा जी, पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?
विभा वर्मा : अपने पति के बढ़ावे, बच्चों के प्यार एवं बहनों व सहेलियों के सान्निध्य से मेरा कई साहित्यिक पटलों से जुड़ाव हुआ। फिर छोटी-छोटी रचनाओं को जोड़कर मैंने कई साझा संकलनों में अपना योगदान दिया, जैसे गंतव्य, अंतर्मन की गूंज, अटल कुंज, नन्ही दुनिया का जादुई सफ़र, बलिदान को नमन, अनवरत, मातृछाया और ख़्वाबों के परिंदे। लिखते-लिखते उत्साहवर्धन हुआ। 200 से ऊपर सम्मान प्राप्ति से और अलग-अलग भावों के साथ जब मेरी कई सारी रचनायें इक्टठा हो गयीं तब मेरे पति श्री अरुण कुमार वर्मा के सुझाव से इन काव्य रचनाओं को जोड़ कर इस काव्यमाला ‘काव्यारुण’ का जन्म हुआ, जिसके लिए मैं प्राची डिजिटल पब्लिकेशन की हार्दिक आभारी हूँ।
AuthorsWiki : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?
विभा वर्मा : मैंने अपनी पहली रचना अपनी माँ को समर्पित कर लिखी थी। यह रचना मेरी पुस्तक ‘काव्यारुण’ में भी प्रकाशित है। पहला प्रकाशन एक साझा संकलन ‘गंतव्य’ था, जिसमें भारत के कई दिग्गज कवियों के साथ मेरी कविताएँ भी प्रकाशित हुई थीं। श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मतिथि पर प्रकाशित अटल कुंज मेरी पहली पत्रिका में लेखनी थी। साहित्य जगत में पहला कदम मेरी सहेलीयों के साथ हुआ, जिनके साथ, स्वतः साथ में मेरा यह सफ़र आगे बढ़ता गया। इनके साथ एवं प्रेम के लिए मैं बहुत कृतज्ञ हूँ। साहित्यिक जगत में मेरे कदम मज़बूत हो, इसके लिए बड़ी श्रेयदार मेरी बहनें हैं, जिन्होंने पल पल मुझे बढ़ावा दिया । मेरे पुत्रों और पुत्रवधुओं ने भी मुझे बहुत प्रोत्साहन दिया और मैं अपने समस्त परिवार का मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ।
AuthorsWiki : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?
विभा वर्मा : साहित्यिक जगत में पूर्णतयः तल्लीन होने के पहले मैंने बहुत से लोकगीत और गानों की संरचना की थी। इनमे मेरे हृदय के सबसे क़रीब मेरी एक भोजपुरी लोकगीत है जिसका नाम है ‘फागुन में बरसे फुहार हो’। एक होली उत्सव में साहित्य कुंज के समारोह में जब यह स्वरचित गीत मैंने प्रस्तुत किया था, तब मेरी सभी सहेलियों ने साथ में यह गीत गाते हुए स्वतः झूमते हुए एक बहुत ही मधुर पल का निर्माण किया था। इस गीत को और मेरे और भी भोजपुरी लोकगीतों को जैसे ‘हाय रामा बरखा में कड़के बिज़ूरिया’ को परिवार और मित्रों का बहुत प्यार मिला। अपने पिता की याद में ‘पापा की लाड़ली’ लिखा था। अपने माता-पिता को याद करते हुए जब इस रचना पर मैंने अपनी गोष्ठी में प्रस्तुत किया था, तब सभी भाव-विभोर हो गए थे। वाहवाही भी मिली, अच्छा लगा।
AuthorsWiki – विभा जी, किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?
विभा वर्मा : मैं अपने साहित्य योगदान का पूरा श्रेय अपने पति श्री अरुण कुमार वर्मा को देना चाहती हूँ। घर परिवार के भार से मुक्त हो सारा ध्यान साहित्य की ओर करने में जीवनसाथी का साथ बेहद सराहनीय होता है। प्रेम, उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन के लिए मैं उन्हें कोटि कोटि धन्यवाद करती हूँ। मेरी सहेलियों ने मुझे साहित्य जगत से जोड़ा और उनके साथ विभिन्न साहित्य मंडलियों में जाने के साथ के लिए उनका बेहद आभार। मेरी सभी बहनों ने प्रोत्साहन दिया, मैं बहुत ही आभारी हूँ। मेरी तीनो पुत्रवधुएँ श्वेता, श्रुति और गरिमा मेरी सबसे बड़ी प्रशंसक हैं और मेरे तीनो पुत्रों अभिषेक, अनिमेष और अभिनव ने मेरी लेखनी में विभिन्न प्रकार से योगदान दिया है। बाल-गीत और लघुकथाओं को मैंने अपने पौत्रों आदित्य, अनय, अंश और समर को समर्पित किया और उनका बहुत प्रेम मिला। मैं अपने समस्त परिवार और मित्रगणों के सान्निध्य के लिए विनम्रता पूर्ण कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ।
AuthorsWiki : विभा जी, साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?
विभा वर्मा : साहित्य जगत में सबसे बदा सम्मान मुझे मेरा उपनाम अलंकार ‘वाची’ मिला। साथ ही मुझे साहित्य शिल्पी सम्मान, काव्य भूषण सम्मान, अटल सम्मान, अटल अलंकृत सम्मान, श्रेष्ठ क़लमकार सहित 200 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए। जिसमें दो गोल्डन बुक के नाम है। एकल पाठ के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ क़लमकार’ और ‘सर्वश्रेष्ठ सृजन सम्मान’ से अलंकृत होती रही।
AuthorsWiki : विभा जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?
विभा वर्मा : मैं मुक्तछंद रचनायें ज़्यादा लिखती हूँ। कोशिश रहती है कि भाव सरल शब्दों में बिखरें। हिंदुस्तानी भाषा में दैनिक वाक् प्रयोग होने वाले शब्दों में भाव व्यक्ति आसान लगती है। श्रृंगार रस, वीर रस, हास्य रस पर भी लिखना पसंद करती हूँ। बाल-गीत, लघुकथा, कहानी, आलेख लिखना बहुत अच्छा लगता है।
AuthorsWiki : विभा जी, आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?
विभा वर्मा : सेवा निवृत्ति एवं तीनो बच्चों के सुखी दाम्पत्य जीवन के प्रवाह के बाद जीवन में शांति और ज़िम्मेदारियों के आज़ादी का अहसास होता रहा। मैं अपने पति के सहयोग के कारण इस मुक़ाम तक पहुँची। मेरे पतिदेव ने जो पल-पल प्रोत्साहन, प्रेम, मार्गदर्शन और सहयोग दिया है, उसके लिए मैं शब्दों में उनकी व्याख्या और नमन नहीं कर सकती।
AuthorsWiki : विभा जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?
विभा वर्मा : मुझे स्वतः यह अनुभूति हुई की मानव के जीवन में जितने भी कार्य और उत्तरदायित्व का निर्वाह कर लो, अगर जीवन पर्याप्त भी अमर रहना है तो आपके शब्द ही हैं जो आपको सदैव जीवित रख सकते हैं। इस अनुभूति के बाद मैं अपने विचारों को शब्दों में उतारने लगी और देखते ही देखते रचनाओं के मोती माला बनती गई और मेरी रचनायें प्रकाशित होने लगी जिससे मुझे और भी प्रोत्साहन मिलता रहा है, और भी अच्छा लिखने का।
AuthorsWiki : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?
विभा वर्मा : बचपन में एन.सी.सी. में थी और वहाँ जब पहली बार राज्य स्तरीय पुरस्कार मिला तब जो ख़ुशी मिली थी। वही ख़ुशी साहित्य के उपनाम समारोह में मिली थी क्योंकि जब विराट साहित्यकार श्री बाबूलाल शर्मा बोहरा ‘विज्ञ’ जी ने जब मुझे ‘वाची’ उपनाम प्रदान किया तो महसूस हुआ कि साहित्य की दुनिया में मेरा आगमन हो चुका है और वो पल मुझे सदैव यादगार रहेगा।
AuthorsWiki : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?
विभा वर्मा : बचपन में प्रेमचंद की अनेको किताबें पढ़ा करती थी। वैसे तो हरिवंशराय बच्चन से ले के महाकवि नीरज जी सभी मेरे आइडियल थे, पर प्रेमचंद की उन्मुक्त हिंदुस्तानी खड़ी बोली में लेखनी ने मुझे बहुत प्रभावित किया और उनकी किताबों से मेरे बाल्यकाल और कॉलेज के दिनों की हसीन यादें जुड़ी हैं। महादेवी वर्मा हमेशा से मेरी प्रिया रचनाकार थी और मैं हमेशा उनसे प्रेरित होती रही हूँ।
AuthorsWiki : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
विभा वर्मा : हिंदी के बिना हिंदुस्तान नहीं। आज जहां एक ओर वैश्विकरण के दौर में सोशल मीडिया के सम्पर्क में लोग अंग्रेज़ी और हिंग्लिश की तरफ़ ज़्यादा रूखसत हैं, वहीं सोशल मीडिया के कारण ही ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का रुझान हिंदी और हिंदी साहित्य की तरफ़ भी अग्रसर हो रहा है। मैं धन्यवाद देना चाहती हूँ, हमारे कलाकारों का, हिंदी पत्रकारिता और देश के सभी बड़े कवियों और लेखकों का जिन्होंने हिंदी साहित्य के प्रति युवाओं में नयी स्फूर्ति भरी है और हिंदी साहित्य आज उत्थान की तरफ़ अग्रसारित है। विदेशों में भी न्यू यॉर्क, न्यू जर्सी, ऐम्स्टर्डैम जैसे देशों में, जहां मेरे बच्चे रहते हैं, वहाँ भी हिंदी साहित्य के प्रति भारतियों का रुझान दिखता है और आशा है कि देश और दुनिया में हिंदी साहित्य का हमेशा उत्थान ही होता रहेगा।
AuthorsWiki : साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
विभा वर्मा : संगीत के प्रति मेरी बहुत रुचि रही है। मैंने क्लासिकल म्यूज़िक, सुगम संगीत, सितार वादन एवं तबले की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है। वर्षों पहले मैं राज्य स्तरीय तबला वादन एवं संगीत समारोहों से जुड़ी थी। आज मैं स्वरचित गीत, वंदना और अन्य गानों को बड़े चाव से समारोहों और ऑनलाइन गोष्ठियों में प्रदर्शन करती हूँ तथा अपने ख़ाली समय में भी गाना गाए हुए एक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
AuthorsWiki : विभा जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
विभा वर्मा : जी हाँ। मेरी अगली पुस्तक मेरे पौत्रों को समर्पित रहेगी और वो एक बाल गीतों का संकलन रहेगा। साथ ही एक और लघु कथाओं की पुस्तक पर भी काम कर रही हूँ और माँ सरस्वती के आशीर्वाद से दोनो पुस्तकें जल्द प्रकाशित होंगी।
AuthorsWiki : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?
विभा वर्मा : स्वयं पर विश्वास रखें। हो सकता है आपको अपनी लेखनी पसंद ना आए, हो सकता है आपको कुछ लोग भी बोलें कि आपमें एक दिग्गज लेखक बनने की क्षमता नहीं है। विनम्रता से सभी की प्रतिक्रियाओं का सम्मान करें और खुद को और भी बेहतर बनाने के लिए प्रयास करें। अपनी लेखनी को सशक्त करें। जितना पढ़ेंगे दूसरों को, उतने आप स्वयं सशक्त होंगे।
AuthorsWiki : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
विभा वर्मा : मैं कुछ शब्दों के माध्यम से अपनी बात कहना चाहूँगी-
लेखनी मेरी ताक़त है, लेखनी मेरी चाहत।
लेखनी मेरी जीवन की अभिलाषा,
ज़िंदगी थम सी जाएगी, अगर लेखनी बंद हुई।
AuthorsWiki : विभा जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?
विभा वर्मा : मैं पाठकों छोटे से काव्य रचना के माध्यम से संदेश दे रहीं हूँ, जो निश्चित ही आपको पसंद आएगी –
समाज को सशक्त करें,
लेखनी अपनी गर्म करें,
आगे मुक़ाम पाना है,
दुनियाँ में नाम कामना है।
मैं अपने पाठकों से कहना चाहूँगी
हिम्मत कभी न हारना
गिर के उठना शान है।
ज़िंदगी को मंज़िल पाना है,
दुनिया में नाम कामना है।
सदा आगे की ओर देखना।
मंज़िल खुद-ब-खुद मिल जाएगी।
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