‘गुलमोहर’ कविता-संग्रह के लेखक एवं कवि परिमल कुमार से विशेष साक्षात्कार

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“Gulmohar” Kavita-Sangrah ke Lekhak aur Kavi Parimal Kumar se Vishesh Samvaad

‘AuthorsWiki’ की ओर से हम परिमल कुमार को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने हेतु हार्दिक धन्यवाद करते हैं। पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि उनकी नवीनतम पुस्तक ‘गुलमोहर’ हाल ही में प्रकाशित हुई है।

श्री खेताराम ताराराम परियारिया, जो साहित्यिक संसार में “परिमल कुमार” के नाम से प्रसिद्ध हैं, एक संवेदनशील कवि, रचनाकार और गहन विचारों वाले लेखक हैं। वर्तमान में वे ‘सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष’ के पद पर कार्यरत हैं और ज्ञान-साधना को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ अत्यंत प्रभावशाली हैं—M.COM, M.LIB & I.SC, UGC-NET, MS-SET, GDC&A, ATD, तथा CIIL-DIL जैसी योग्यताएँ उनके अध्ययन-प्रेम, लगन और बहुआयामी ज्ञान का प्रमाण देती हैं।

साहित्य, शिक्षा और समाज—इन तीनों आयामों के सुंदर संगम से परिमल कुमार ने अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उनके अनुभवों की गहराई, सूक्ष्म अवलोकन और सहज परंतु प्रभावशाली अभिव्यक्ति उनकी रचनाओं को पाठकों से सीधे जोड़ती है। एक लेखक, कवि और शिक्षाविद के रूप में वे शब्दों के माध्यम से समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन लाने को अपना उद्देश्य मानते हैं।

साक्षात्कार के दौरान लेखक ने अपने साहित्यिक सफर, अनुभवों और प्रेरणाओं को बड़े सहज भाव से हमारे साथ साझा किया। हमें विश्वास है कि पाठकों को परिमल कुमार के साथ यह विशेष बातचीत अवश्य पसंद आएगी। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश—

AuthorsWiki: आपको पहली बार कब एहसास हुआ कि आप लेखक बनना चाहते हैं?

परिमल कुमार: सच कहूँ तो मैं छठी कक्षा से लिखना आरंभ कर चुका था। तब महाराष्ट्र के प्रख्यात एवं प्रमुख समाचार पत्र ‘दै. सकाळ’ में मेरी पहली कथा प्रकाशित हो चुकी थी। पर सही एहसास तो कारगिल युद्ध के पश्चात ही प्रेरणारूप से मेरे मन को विचलित करता रहा। देशप्रेम लिखने पर मजबूर करता रहा। देशप्रेम की कविताओं ने मुझे पहली बार यह एहसास दिलाया कि मैं भी लिख सकता हूँ, या शायद मैं लेखक बन सकता हूँ।

AuthorsWiki: आपकी एक पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी देना चाहेंगे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

परिमल कुमार: ‘गुलमोहर’ यह एक मराठी कविता संग्रह है। मैं अपनी भावनाओं को कलम की सहायता से मिले अनुभव को प्रेरणा मानता हूँ। यह कविता संग्रह आधुनिक युग की चुनौतियों और संभावनाओं पर एक गहरा विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह पाठकों को वर्तमान सामाजिक, तकनीकी और मनोवैज्ञानिक परिदृश्यों को समझने में मदद करता है।

AuthorsWiki: पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

परिमल कुमार: जी, प्रेरणा उन शब्दों ने दी, जो मुझे हर पल लिखने पर मजबूर करते हैं। और ख्यातनाम कवि एवं साहित्यिक श्री नारायणजी सुर्वे की प्रेरणा से ही आज मैं इस मुकाम पर हूँ।

AuthorsWiki: पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

परिमल कुमार: सफर बहुत ही सफल रहा। प्रकाशक के सहयोग से यह पुस्तक मेरे अस्तित्व, मेरी क्षमताओं और उस विशाल दुनिया की एक खोज-यात्रा है, जहाँ मैं रहता हूँ और सीखता हूँ। यह प्रकाशक के सहयोग के बिना असंभव था। ‘गुलमोहर’ सिर्फ एक सृजन का विवरण नहीं है, बल्कि भावनाओं के नज़रिए से मानव ज्ञान, रचनात्मकता और भविष्य की संभावनाओं पर एक दार्शनिक चिंतन है। यह सफर मुझे प्रोत्साहित करता है और मुझे लिखने की आत्मबल-प्रधानता देता है। प्रकाशक के सहयोग से सफल रहा।

AuthorsWiki: आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ?

परिमल कुमार: मेरी पहली सृजित रचना ‘माझे वेदनेशी नाते’ यह मराठी कविता संग्रह है, जो 2012 में प्रकाशित हुआ था।

AuthorsWiki: अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी कौन-सी रचना है जिसे पाठक वर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

परिमल कुमार: एक पेट में पल रही मासूम कली ने अपनी मां से करुण विनती की थी कि “मुझे जन्म लेने दो — ‘आई… मला जगायचंय’.” प्रस्तुत काव्य में भ्रूणहत्या का विवेचन किया है। यह रचना सभी पाठकों को दिल छू गई थी, ऐसा मुझे लगता है। मेरे पाठक वर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों ने सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएँ दी थीं।

AuthorsWiki: किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

परिमल कुमार: साहित्य सृजन के दौरान मुझे सबसे अधिक सहयोग मेरे दोस्तों से प्राप्त हुआ। उन्होंने न केवल मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया, बल्कि आवश्यक शांत वातावरण और समय भी प्रदान किया। हर अध्याय पूरा होने के बाद वे मेरे पहले पाठक बनते थे और बहुमूल्य सुझाव देते थे। उनका अटूट समर्थन ही मेरी प्रेरणा का मुख्य स्रोत रहा।

AuthorsWiki: साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं?

परिमल कुमार: मेरी साहित्यिक यात्रा को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया है। समय-समय पर मिले ये पुरस्कार न केवल मेरी रचनाओं की पहचान हैं, बल्कि मेरे लेखन पथ के प्रेरक स्रोत भी रहे हैं। अब तक मुझे निम्न सम्मान प्राप्त हुए हैं-

  • 1999 में पुणे नगर निगम का ‘पुणे गौरव सन्मान’,
  • 2000 में ‘लहुजी वस्ताद फाउंडेशन’ का ‘एकलव्य समता पुरस्कार’,
  • 2008 में ‘पुणे विश्वविद्यालय’ का ‘काव्यरचना पुरस्कार’,
  • 2012 में ‘चौधरी प्रकाशन’ का ‘साहित्यरत्न पुरस्कार’,
  • 2012 में ‘पश्चिम विभागीय भाषा केंद्र’ (भारतीय भाषा संस्थान, नवोदित साहित्यकार, मराठी विभाग) का ‘काव्यप्रतिभावंत’ राष्ट्रीय पुरस्कार,
  • 2012 में ‘रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया’ का ‘बोपोडी गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित।

AuthorsWiki: आप सबसे ज्यादा लेखन किस विधा में करते हैं? और क्या इस विधा में लिखना आसान है?

परिमल कुमार: कविता करना मेरे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण विधा है—जहाँ सूक्ष्म मानवीय भावनाओं, सांस्कृतिक बारीकियों और मौलिक रचनात्मकता की आवश्यकता होती है। संक्षेप में, मैं सबसे ज्यादा तथ्य-आधारित और वर्णनात्मक लेखन करता हूँ, और मेरे निरीक्षण एवं आकलन के कारण यह विधा मेरे लिए सबसे आसान है।

AuthorsWiki: आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

परिमल कुमार: मैं समय का प्रबंधन नहीं करता; मैं समय की सीमाओं के साथ चलने वाला हूँ। मैं हर पल सृजन करने के लिए तैयार रहता हूँ।

AuthorsWiki: आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहाँ से प्राप्त करते हैं?

परिमल कुमार: मैं हालातों के बीच संबंध देखता हूँ। कुछ शब्द मेरे साथ सहज जुड़ जाते हैं, कुछ वाक्य पाठक को बांध लेते हैं और कुछ संरचनाएँ अधिक प्रभावी होकर मुझे गले लगाती हैं। इन भाषाई प्रतिभाओं को जोड़ना और नया रूप देना ही मेरे लिए “रचनात्मक प्रेरणा” है।

AuthorsWiki: आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना?

परिमल कुमार: एक कवि की सरल और सशक्त अभिव्यक्ति समाज में व्यापक बदलाव ला सकती है और उन्हें अमर कर सकती है। ‘काव्यप्रतिभावंत’ पुरस्कार मेरे जीवन की विशेष उपलब्धियों में से एक यादगार घटना साबित हुई। हमारे देश के भूतपूर्व उपराष्ट्रपति के शुभहाथों से सम्मान प्राप्त करना किसी सुवर्ण स्मृति से कम नहीं था।

AuthorsWiki: आपका आदर्श लेखक कौन है? और आपकी पसंदीदा किताबें?

परिमल कुमार: जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’; मराठी साहित्य में कुसुमाग्रज, विंदा करंदीकर, पु. ल. देशपांडे, शिवाजी सावंत, नारायणजी सुर्वे — ये सभी मेरे आदर्श लेखक हैं और उनकी सभी रचनाएँ मुझे पसंद हैं।

AuthorsWiki: हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आपका विचार?

परिमल कुमार: मैं इतना बड़ा नहीं कि कुछ कह सकूँ, मगर हिन्दी भाषा और साहित्य का उत्थान तभी संभव है जब हम सभी—लेखक, पाठक, शिक्षक और आम नागरिक—इसे सक्रिय रूप से उपयोग करें, बढ़ावा दें और नई चुनौतियों के अनुसार ढालें। भाषा जीवंत होती है और इसका जीवन हमारे उपयोग पर निर्भर करता है।

AuthorsWiki: साहित्य सृजन के अलावा आपके अन्य शौक?

परिमल कुमार: चित्रकारी और संगीत में विशेष रुचि रखता हूँ। चित्रकारी और संगीत मेरे लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि मन को शांति और ऊर्जा देने वाले साधन हैं। खाली समय में मैं रंगों और सुरों की दुनिया में खो जाना पसंद करता हूँ—जहाँ मन स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त हो पाता है।

AuthorsWiki: क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना है?

परिमल कुमार: जी हाँ! नया काव्य संग्रह ‘माझ्यातली ती’ (मराठी कविता संग्रह) और इतिहास में रुचि के कारण उपन्यास ‘जौहर – एक स्वाभिमानाची धगधगती अग्निज्वाला’, ‘शिवशंभू’ और ‘प्रणप्रताप’ प्रकाशनाधीन हैं।

AuthorsWiki: नए लेखकों को आप क्या सलाह देंगे?

परिमल कुमार: साहित्य की दुनिया में आपका स्वागत है। यह एक अद्भुत यात्रा है, जहाँ शब्द जादू पैदा कर सकते हैं। अपनी कल्पना को उड़ान दें, मेहनत करें और सबसे महत्वपूर्ण—लिखना बंद न करें।

AuthorsWiki: क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

परिमल कुमार: जी हाँ, अब तो मेरा और शब्दों का एक शरीर–एक प्राण-सा रिश्ता हो चुका है।

AuthorsWiki: अपने शुभचिंतकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए आपका संदेश?

परिमल कुमार: मेरे सभी अज़ीज़ शुभचिंतकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए—“शब्दज्ञान की खोज कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। हर दिन सीखें, सवाल पूछें और अपनी जिज्ञासा को जीवित रखें। प्रौद्योगिकी और मानवता मिलकर एक अद्भुत भविष्य बना रहे हैं और साहित्य इस सबका अहम हिस्सा है। लिखो और लिखते रहो। इस यात्रा में मैं हमेशा सहभागी हूँ। आपके प्यार और समर्थन के लिए मैं हृदय से आभारी हूँ और सदा आभारी रहूँगा।”

लेखक की पुस्तक कैसे प्राप्त करें-

आप लेखक की पुस्तक को अपने पसंदीदा ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं।

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