
पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा काव्य प्रभा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ द्वारा किया गया है। ‘काव्य प्रभा’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘काव्य प्रभा’ काव्य संग्रह के एक लेखक प्रफुल्ल कुमार पांडेय जी से साक्षात्कार-
AuthorsWiki : क्या आप अपने शब्दों में हमारे सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देना चाहेंगे? क्योंकि आपके शब्दों में हमारे पाठक आपके बारे में ज्यादा जान पाएंगे।
Prafull Kumar Pandey : मैं प्रफुल्ल कुमार पाण्डेय, वाराणसी के छोटे से गांव गजाधरपुर का वासी हूँ। पैरों से दिव्यांग हूँ, दसवीं की पढ़ाई हमने अपने पैरों पर चलकर की। बाद धीरे-धीरे मेरी शारीरिक कमजोरी बढ़ती गई, बड़ी कठिनाईयों से हमने दसवीं और इंटर की पढ़ाई की। उसके बाद 2009 में बी.एच.यू. बीए में मेरा एडमिशन हुआ तो मेरे पिता जी बहुत खुश हुए लेकिन भगवान को मेरे पापा की खुशियां रास नहीं आई।
जब एग्जाम का वक़्त आया तो मेरे पिता जी की सेहत बिगड़ गई। जांच हुई तो रिपोर्ट में पता चला कि गले का कैंसर है और साल भर का वक़्त है जिसकी वजह से पापा की चिंता में ही खोया रहता था, जिससे मैं फेल हो गया तो पापा ने बैक ईयर एग्जाम का फॉर्म भरवा दिया ताकि जिस विषयों में मैं फेल हुआ था। उसका दोबारा परीक्षा देकर पास हो जाऊं 10/01/2011 को मेरे पिता जी का देहांत हो गया, जिससे मैं पूरी तरह टूट गया। जब बैक ईयर का एग्जाम देने का वक़्त आया तो मुझे पीलिया हो गया। जिसकी वजह से मैं परीक्षा दे ना सका। दो यूनिट खून चढ़ा तो मेरी तबियत ठीक हुई।
दस साल हो गए मेरी पढ़ाई छोड़े हुए। 95% मेरी दिव्यंगता है, मैं कोई भी कार्य कर पाने में असमर्थ हूँ, सिर्फ लिख सकता हूँ। व्हीलचेयर ही मेरा सहारा है लेकिन मुझे लिखने का बहुत शौक है। मुझे कविता, ग़ज़ल, गाना, उपन्यास, कहानी, दोहा मुझे लिखना आता है, मुझे बारिश बहुत पसंद है। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने मुझे दुनिया में खुद को साबित करने का एक बेहतरीन आयाम दिया है। मेरी कमजोरी ही ताकत है और मैं एक धर्म की स्थापना करना चाहता हूँ। मैं महात्मा बुद्व और स्वामी विवेकानंद जैसे महान दार्शनिक बनना चाहता हूँ और दुनिया को एक बदलाव की राहों पर ले जाना चाहता हूँ।
मेरा दिल से धन्यवाद है कि प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने मुझे जिंदगी में कुछ अच्छा करने का मौका दिया है, जिसे बखूबी निभाने की पुरजोर कोशिश करूंगा। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन मैं आपकी जितनी भी प्रशंसा करूँ, कम ही होगा। मुझ जैसे लाचार बेबस इंसान को जिंदगी ही दे डाली। आज से साहित्य ही मेरा जीवन है साहित्य मेरा सबकुछ है साहित्य को मैं स्वर्णिम युग देना चाहता हूँ।
AuthorsWiki : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में अन्य सहयोगी रचनाकारों के साथ सहयोगी रचनाकार के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?
Prafull Kumar Pandey : मुझे इस काव्य संग्रह से बहुत कुछ सीख मिली। कैसे अपने हुनर को दुनिया के सामने लाना है इस काव्य संग्रह से मुझे वो मुकाम मिल गया, जिन राहों ने ठोकर दिया, उन्हीं राहों ने मुझे मंजिल दे दी। मेरा अनुभव सहयोगी रचनाकारों के साथ बेहतरीन रहा। मेरा सभी सहयोगी सम्मानित लेखकों और कवियों दिल से नमस्कार है।
AuthorsWiki : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में आपकी रचनाएं किस विषय पर आधारित हैं?
Prafull Kumar Pandey : काव्य प्रभा में मेरी रचनाएं आत्मविश्वास से भरी हुई है, जिसे पढ़कर पाठकों को बहुत ही पसंद आएगा।
AuthorsWiki : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
Prafull Kumar Pandey : अभी तो ये मेरा आगाज है साहित्य के क्षेत्र में तो सम्मान का मिलना थोड़ा मुश्किल है
AuthorsWiki : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?
Prafull Kumar Pandey : मैने एक काव्य संग्रह में भाग लिया था, जिसका नाम ‘रूह ए मोहब्बत’ है। जिसका अभी कवर तो आ चुका है, ईमेल पर सर्टिफिकेट भी आ चुका है बुक छपने का काम चल रहा है।
AuthorsWiki : आप कब से लेखन कर रहें हैं और लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?
Prafull Kumar Pandey : लेखन के अलावा मेरे पास किसी भी प्रकार का कोई व्यवसाय नहीं है।
AuthorsWiki : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
Prafull Kumar Pandey : मैंने एक उपन्यास लिखा हुआ है जिसको अभी रिवाइज कर रहा हूँ, कुछ दिन में ही कंप्लीट हो जाएगी। डेढ़ सौ पन्नों का है लेकिन वो उपन्यास काल्पनिकता के आधार पर है। मेरे लेखन का विधि है लिखते जाओ लिखते जाओ उसके बाद जब कंप्लीट हो जाए तो उसे अच्छी तरह से रिवाइज करना फिर उसको सही रूप प्रतिरूप देना।
AuthorsWiki : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
Prafull Kumar Pandey : हिंदी भाषा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। साहित्य के क्षेत्र में किताबों को पढ़ने की परम्परा बरकरार रहे।
AuthorsWiki : लेखन के अलावा आपके शौक या हॉबी?
Prafull Kumar Pandey : बारिश में घूमना फिरना, नाव पर घूमना, धार्मिक बातें करना, खुद से ही बातें करना, भीड़ से अलग रहना ज्योतिष में रुचि, गंगा के किनारे बैठना, रात को चांदनी रातों में घूमना, चांद को रात भर देखना, लोगों की भलाई करना, गाने सुनना, माउथ हर्मोनिका बजाना, सारी म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स बजाना सीखना, हमेशा आत्मविश्वास से सराबोर रहना और मां दुर्गा की पूजा पाठ करना।
AuthorsWiki : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
Prafull Kumar Pandey : मेरा काल्पनिकता के आधार पर लिखा हुआ उपन्यास आवारगी होगा।
AuthorsWiki : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
Prafull Kumar Pandey : कोई भी परिस्थिति हो कोई भी बुरा समय ही धैर्य संयम बनाकर हर परिस्थिति पर विजय प्राप्त करना गरीबों की मदद करना क्योंकि भगवान मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा में नहीं, इंसानों के भीतर समाहित है। भगवान धर्म एक ही होना चाहिए, इंसानियत का सत्यता का संसार में हर कोई कर्म कर रहा है, इसलिए कर्म ही सर्वोपरि है संसार में क्योंकि वसुधैव कुटुंबकम्।
AuthorsWiki : आपके पाठकों को काव्य प्रभा क्यो पढ़नी चाहिए? इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?
Prafull Kumar Pandey : मेरे प्यारे पाठकों आप सभी से दिल से आग्रह है कि काव्य प्रभा के सभी रचनाओं को आनंद पूर्वज जरूर पढ़िएगा जीवन में आगे बढ़ने और कुछ करने का नया विश्वास मिलेगा।
About the ‘Kavya Prabha‘

साहित्य के सभी रसों से पगी ‘काव्य प्रभा’ एक मित्र की भाँति कभी आपको गुदगुदाएगी तो कभी आपके मन-मस्तिष्क को झकझोरती-सी प्रतीत होगी। इस पुस्तक में जहाँ एक ओर विशुद्ध हिंदी की रचनाएँ आपके मन में पैठ जमाती लक्षित होंगी, वहीं दूसरी ओर उर्दू के कुछ ख़याल भी अपना जादू बिखेरते नज़र आएँगे। काव्य प्रभा में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकार भी आपको अपनी साहित्य सुरभि की मोहक बयार से सहलाएँगे। ‘काव्य प्रभा’ के सभी रचनाकार साहित्य रूपी सागर के उन अनमोल मोतियों की तरह है जिनकी तलाश हर साहित्य प्रेमी को होती है। उम्मीद है इन्हें पढ़कर साहित्य रसिकों की साहित्य पिपासा अवश्य ही शांत होगी।
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