काव्य संग्रह ‘काव्य तृषा’ के लेखक समीर सिंह राठौर जी के साथ साक्षात्कार

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AuthorsWiki को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए समीर सिंह राठौर जी को धन्यवाद करते हैं। पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि लेखक का एक काव्य संग्रह ‘तृषा’ पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ है। समीर सिंह राठौर जी ने AuthorsWiki को साक्षात्कार के दौरान साहित्यिक सफर एवं अनुभवों को भी हमारे साथ साझा किया। आशा करते हैं कि पाठकों को समीर सिंह राठौर जी का साक्षात्कार पसंद आएगा। साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

AuthorsWiki : नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

Sameer Singh Rathore : सबसे पहले तो मैं आपका आभार प्रगट करता हूँ कि आपने मुझे साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। आपसे अपनी बात साझा करते हुए मुझे हर्षातिरेक अनुभूति हो रही है। मेरा नाम समीर सिंह राठौड़ है, पिता श्री पवन कुमार सिंह, पता बंशीपुर, शंभुगंज, बाँका, बिहार का निवासी हूँ। पिछले 12 वर्षों से शिक्षण कार्य मे हूँ तथा साहित्य की सेवा में लगा हूँ।

AuthorsWiki : आपकी एक पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी देना चाहेंगें, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Sameer Singh Rathore : जी बिल्कुल, मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक का नाम ‘काव्य तृषा’ है, इस पुस्तक का नाम मैंने अपनी बड़ी पुत्री तृषा मोहिनी के नाम पर रखा और मुझे गर्व है कि मैं अपनी पुत्री के लिए पहला सार्थक कदम उठाया। इस पुस्तक में मैंने बेटियों के लिए कई रचनाओं को सृजित की ताकि समाज मे बेटी के प्रति एक नया विचार उत्पन्न हो सके। हालांकि साझा संकलन है तो निश्चित रूप से आपको विभिन्न विषयों पर कविता पढ़ने को मिलेगी।

AuthorsWiki : पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

Sameer Singh Rathore : यह मेरा सपना कह सकते है। मेरे पास कविताओं का संग्रह था और इसको संग्रहित करने के लिए इससे उत्तम तरीका शायद कुछ नही है। दूसरी तरफ मेरी पत्नी ने भी मुझे इसमें मदद की। उन्होंने पुस्तक प्रकाशन के लिए मुझे प्रेरित भी किया।

AuthorsWiki : पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें?

Sameer Singh Rathore : हाँ बिल्कुल, कविता लिखने का अनुभव मेरा लगभग 8-10 वर्षो का रहा है। कई बार तो कविता लिखकर उसे मिटा देते, यदि शब्दों का सार्थक चयन न रहता या यूँ कहें कि विषय वस्तु से हटकर रहती तो। प्रकाशन में प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का भरपूर सहयोग मिला। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि ऐसे लोकप्रिय प्रकाशन का सहयोग रहा, जिससे मुझे ज्यादा कोई परेशानी न रही।

AuthorsWiki : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?

Sameer Singh Rathore : मेरी पहली रचना थी ‘हे भगवान वो स्थान कहाँ जो मैं आपसे मिलूँ?’ मैं अपने पिता जी के साथ बगीचे में घूम रहा था। अचानक मैं एक पेड़ के नीचे बैठ गया बगीचे के रमणीय वातावरण तथा चारो ओर की शान्ति में मैंने पहली पंक्ति जमीन पर ही लिख डाली। मुझे लगा मैं कविता लिख सकता हूँ और धीरे-धीरे लिखना भी शुरू कर दिया। मेरे एक शिक्षक मुझे इसके लिए काफी प्रोत्साहित किये। मेरी कई लेख अखबारों में प्रकाशित हुई तो लिखने की उम्मीद भी बढ़ गयी।

AuthorsWiki : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

Sameer Singh Rathore : अंगिका में मेरा एक गीत है ‘हमरो देश के वीर जवान’ इसे बहुत लोगों ने भरपूर प्यार दिया। कई मंचो पर भी मैंने इसे सुनाया तो लोगों की प्रतिक्रिया से हर्षातिरेक अनुभूति हुई।

AuthorsWiki : किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

Sameer Singh Rathore : मेरी पत्नी के अलावा मेरे कई साहित्यकार भाई-बहन, मेरे विद्यालय एम्बिशन पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं विद्यालय परिवार का काफी योगदान रहा।

AuthorsWiki : साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?

Sameer Singh Rathore : अबतक कम से कम 10 से अधिक सम्मान, कई प्रशस्ति पत्र, कई पत्रिकाओं में रचना का प्रकाशन, राष्ट्रीय स्तर के पुस्तक में कविता कई कविताओं का प्रकाशन, देश के विभिन्न अखबारों में कविताएँ तथा गीत-कहानियों का प्रकाशन हुआ है। इसके अलावा कई मंचो पर भी सम्मान प्राप्त हो चुके है।

AuthorsWiki : आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

Sameer Singh Rathore : श्रृंगार रस में ज्यादा करता हूँ, हालांकि वीर रस में भी करता हूँ लेकिन शुरुआत से श्रृंगार रस/विरह में ज्यादा दिलचस्पी रही। इस रस में मैं किसी भी तरह की रचना कभी भी लिख सकता हूँ।

AuthorsWiki : आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

Sameer Singh Rathore : जब भी थोड़ा समय मिल जाता है, मैं लिखना शुरू कर देता हूँ। कई बार तो रचना पूरी नही हो पाती है, फिर रात्रि में उसे पूरी करता हूँ। ज्यादा समय मुझे रात्रि में ही मिल पाता है। मुझे लगता है कि कविता लिखने का कोई उपयुक्त समय नही है, जब भी भाव-विचार आ जाये लिख देते है।

AuthorsWiki : आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

Sameer Singh Rathore : माँ सरस्वती का आशीर्वाद है। अचानक कोई भाव/विचार आ जाते है अथवा किसी विषय-वस्तु या घटनाओं को देखकर लिख देता हूँ।

AuthorsWiki : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

Sameer Singh Rathore : पहली बार जब मेरा चयन भागलपुर रेडियो स्टेशन में अपनी कविता पाठ के लिए आमंत्रित हुआ, तो लगा यह मेरे जीवन की पहली साहित्यिक उड़ान है कई दिन पहले से ही इसकी तैयारी में लग गया और काफी उत्साहित भी था।

AuthorsWiki : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?

Sameer Singh Rathore : कहानी की बात करें तो प्रेमचंद मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ है। यदि कविता की बात करें तो गीतकार राजेन्द्र राजन, डॉ. विष्णु सक्सेना, प्रियांशु गजेंद्र है। हालाँकि अपने छात्र जीवन से ही महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन आदि की कविताएं खूब पढ़ी।

AuthorsWiki : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Sameer Singh Rathore : जी बिल्कुल, सबसे पहले तो मैं भारत सरकार से यह आग्रह करूँगा कि हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा मिले। साथ ही हिन्दी को मुख्य भाषा के रूप में प्रयोग किया जाएँ।

AuthorsWiki : साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Sameer Singh Rathore : साहित्य के अला मुझे और किसी भी प्रकार का कोई शौक नही है न ही कोई खेल पसंद है। मैं बचपन से ही इन सब चीज़ों से अलग रहा। हां, जब भी समय मिलता है तो इंटरनेट पर कोई नई जानकारी या समाचार देख लेता हूँ।

AuthorsWiki : क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Sameer Singh Rathore : जी बिल्कुल, मेरी दो बेटियां है। पहली पर तो मेरी पुस्तक प्रकाशित हो गयी और अब दूसरी बेटी समिषा के लिए भी एक पुस्तक का प्रकाशन लाज़मी है।

AuthorsWiki : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

Sameer Singh Rathore : मुझे लगता है कि वर्तमान घटनाओं पर कविता लिखना ज्यादा सार्थक होगा। यह हमारी आवाज़ भी बनेगी। जो नवोदित अभी लिख रहे है, उन्हें चाहिए कि साहित्य को समाज से जोड़ें।

AuthorsWiki : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Sameer Singh Rathore : बिल्कुल, एक तरह से कह सकते है कि साहित्य मेरा अभिन्न अंग है इसे मैं कभी अलग नही कर सकता। जब तक है जान कविता लिखते रहेंगे।

AuthorsWiki : यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

Sameer Singh Rathore : आज के दौर में लोगों में साहित्य के प्रति बेरुखी है, अनभिज्ञ भी हैं। मेरा आग्रह है कि वो साहित्य से जुड़ें। साहित्य समाज का दर्पण है। एक किताब प्रकाशन में लेखकों/प्रकाशकों की असीम मेहनत हैं। किसी भी किताब को पढ़ें और प्रोत्साहन प्रसाद देते रहें।

लेखक की पुस्तक कैसे प्राप्त करें-

आप लेखक की पुस्तक को अपने पसंदीदा ऑनलाइन स्टोर अमेजन या फ्लिपकार्ट से मंगा सकते हैं। किताब को खरीदने के लिए लिंक नीचे दिए गए हैं।

यदि आप लेखक की किताब को पढ़ चुकें हैं तो अपनी प्रतिक्रिया या विचारों को कमेंट करके जरूर शेयर करें।

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