
मेरी कल्पनाओ का चाँद, जो मेरे जीवन की कुछ भावनाओं, कल्पनाओं को समेटे है! कुछ प्यार, कुछ उलझनों में उलझी मेरी ‘चन्द्री – एक प्रेम कविता’ जिसमे प्रेम की चाह के साथ दुनिया का डर, परिवार का साथ और प्रभु की बनाई दुनिया की शिकायत है, चाहत है, वादें है, साथ जीने की इच्छा और तड़फते मन की व्यथा है! ‘चन्द्री’ जीवन के अनेक बिन्दुओं को छूती है कभी प्रेम, कभी ख्याल, कभी वास्तविकता में विचरती है और एक अधूरी प्रेम कहानी की तरह अधूरी ही है जो पूरी नही होती और ये ही प्यार की सार्थकता है, उसका चरम है, उत्कर्ष है, जादू है और आकर्षण का मूल मन्त्र है! ‘चन्द्री’ प्रेम, वफ़ा को परिभाषित करने की काेशिश है, दिल का जुनून है, चाहतों और कर्तव्यों में द्वन्द है, मन की बेबसी और उड़ने की उमंग है, और अंतत: चन्द्री एक ख्वाब है, ख्याल है, हकीकत है पर हकीकत से परे है।
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Description of Book
Author | |
ISBN | 978-93-87856-06-6 |
Language | Hindi |
Binding | Paperback |
Genre | Poetry |
Pages | 96 |
Publishing Year | January, 2020 |
Publisher |
About the Author
लेखक डॉ. प्रदीप कुमार सुमनाक्षर ने दिल्ली विश्व विद्यालय से बी.ए., एम.ए. (राज. विज्ञान) एवं एम. लिब. की शिक्षा प्राप्त की है। साथ ही आपको विध्यावाचस्पति और विधाविशारद (मानद) उपाधियाँ प्राप्त है। डॉ. प्रदीप कविता मंच, नई दिल्ली के अध्यक्ष और नीरज फेन्स क्लब, दिल्ली के सचिव भी है। लेखक की अब तक दर्जन भर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों द्वारा बहुत पसंद किया जा चुका है।
















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